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आडवाणी की राह के रोड़े
 
  • Author : रूपक प्रियदर्शी

लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव लड़ने के भैरों सिंह शेखावत के एलान ने बीजेपी को करारा झटका दिया है. बीजेपी ने किसी तरह से भैरों सिंह शेखावत औऱ लालकृष्ण आडवाणी की आमने-सामने मुलाकात कराकर मामला शांत करने की कोशिश तो की है, लेकिन शेखावत ने कोई वादा नहीं किया है कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगे.
लालकृष्ण आडवाणी ने कभी सोचा नहीं होगा कि 50 बरस के पुराने साथी भैरों सिंह शेखावत प्रधानमंत्री बनने की राह में ऐसे रोड़े अटकाएंगे. शेखावत की सियायत पंडारा रोड के घर में प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे आडवाणी के लिए खतरे की घंटी है.
लालकृष्ण आडवाणी एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. ये बात एनडीए ने भी मान ली, बीजेपी ने भी औऱ संघ परिवार ने भी. क्योंकि सिवाय आडवाणी कोई औऱ विकल्प भी नहीं था औऱ आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला वाजपेयी की सहमति से हुआ.
लेकिन ये भी सच है कि कट्टर हिंदूत्व छवि के कारण एनडीए ने कभी आडवाणी को दिल से नहीं स्वीकारा. जिन्ना विवाद के बाद संघ की नजर आडवाणी के प्रति टेढ़ी हुई. ये दोनों बातें आडवाणी की राह में रोड़ा हैं. शेखावत यहीं बाजी मार सकते हैं. इसी आशंका में दुबला हुआ जा रहा है आडवाणी कैंप.
शेखावत बीजेपी के ऐसे नेता हैं, जिनकी गैर-बीजेपी कैंप से खूब छनती है. सरकार के गठन के समय एनडीए कैंप में घटकों को जुटाने का काम शेखावत ने ही किया था. संघ भी शेखावत से परहेज नहीं करेगा. क्योंकि 86 साल के पुराने संघी शेखावत कभी भी संघ के आँखों की किरकिरी नहीं बने.
आडवाणी की कट्टर हिंदूवादी छवि को जिन्ना विवाद ने धो दिया. संघ आज आडवाणी को पूरे यकीन के साथ नहीं देखता.
क्योंकि आज के आडवाणी, पुराने आडवाणी शायद नहीं रहे. बीजेपी ने हिंदुत्व का लाबादा ओढ रखा है, लेकिन पार्टी को हिंदुत्व के नाम पर वोट मिल रहे हैं या मिलते रहेंगे, कहना मुश्किल है, क्योंकि विकास, आतंकवाद के एजेंडे ने उसे हाशिए पर धकेल दिया है.
आडवाणी ने अमरनाथ विवाद को जम्मू कश्मीर में मुद्दा बनाया. बीजेपी को फायदा मिला, लेकिन आडवाणी तो उन मुद्दों को भूल ही गए, जिनको सीढ़ी बनाकर बीजेपी सत्ता में बैठी. एक बार नहीं. तीन बार. कहां हैं जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म करने का वादा, कहां अयोध्या में राम मंदिर. 5 साल में शायद ही कभी आडवाणी को याद आया फायरब्रांड नारा-कसम राम की खाते हैं, मंदिर वही बनाएंगे.
बीजेपी में अटल शिखर पुरूष तो आडवाणी को लौह पुरूष कहा गया, लेकिन लोकसभा में जब मनमोहन सरकार ने विश्वास मत मांगा तो लौह पुरूष पिघल गए. भरी संसद में देश के सामने कह दिया कि वो सरकार गिराना नहीं चाहते. और सचमुच बीजेपी के विभीषिणों के कारण सरकार बच गई.
2004 में एनडीए ने सत्ता खोई. संयोगवश या पूर्व निर्धारित योजना के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी में सक्रिय भूमिका से किनारा कर लिया. वाजपेयी के बाद बीजेपी, संघ, एनडीए ने लौह पुरूष आडवाणी को अपना अभिभावक मान लिया, लेकिन आडवाणी न तो संघ पर असरदार रहे, न पार्टी में. ये आडवाणी का ही वक्त था जब बीजेपी के फायरब्रांड नेता उमा भारती, मदन लाल खुराना, बाबूलाल मरांडी बागी हो गए. जिसने जाने का रास्ता चुना, आडवाणी ने जाने दिया.
आडवाणी राज में बीजेपी ने राज्यों में तरक्की तो खूब की, लेकिन ये करिश्मा शायद आडवाणी का नहीं, नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह जैसे क्षत्रपों का था. विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार यही सोचकर घोषित किया था, लेकिन क्या वोट आडवाणी के नाम पर मिले? और क्या 2009 के चुनाव में भी आडवाणी के नाम पर ही वोट मिले. ये वक्त बताएगा, लोकसभा की लड़ाई के नतीजे बताएंगे.
 
 
8   Comments
   
shishir richhariya  said...
advani sahi vikalp nahi hai pm ke liye.bjp ke jitni bhi seats aayengi lok sabha ke chunav main wo sirf unke c.ms ki wajah se ayengi.agar advani ko pm bana hai to modi ji ko home minister declare karde chunav se pehle...thanku star news..
Jan 30, 2009 12:16AM
 
Ankit Tiwari  said...
कांग्रेस राज बब्बर के मुकाबले उम्मीदवार के एलान से वो बौखलाई हुई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रिश्तों में लगातार कड़वाहट घुलती जा रही है। कम से कम राजबब्बर की उम्मीदवारी पर कांग्रेस किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है। खासकर तब जब राज बब्बर पहले ही अपनी पसंद जाहिर कर चुके हैं। मोटे तौर पर ये तय हो चुका है कि यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बहुत दूर तक साथ-साथ चलना नहीं चाहते। लेकिन ये साफ नहीं हुआ है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच रिश्ता कैसा होगा। इससे दोनों दलों के कार्यकर्ता और नेता ऊहापोह में हैं और दोनों को इसका नुकसान भी झेलना पड़ेगा।
Jan 29, 2009 3:31PM
 
Ankit Tiwari  said...
kya advani g atal g ke dvara kia gaye kam ko aage badha payege
Jan 29, 2009 3:20PM
 
shatrudhan  said...
narendra modi pm honachahiye.gujrat jaisa pure india me vikash hoga
Jan 29, 2009 2:10PM
 
लालकृष्ण  said...
लालकृष्ण आडवाणी एनडीए की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. ये बात एनडीए ने भी मान ली, बीजेपी ने भी औऱ संघ परिवार ने भी. क्योंकि सिवाय आडवाणी कोई औऱ विकल्प भी नहीं था औऱ आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला वाजपेयी की सहमति से हुआ. लेकिन ये भी सच है कि कट्टर हिंदूत्व छवि के कारण एनडीए ने कभी आडवाणी को दिल से नहीं स्वीकारा. जिन्ना विवाद के बाद संघ की नजर आडवाणी के प्रति टेढ़ी हुई. ये दोनों बातें आडवाणी की राह में रोड़ा हैं. शेखावत यहीं बाजी मार सकते हैं. इसी आशंका में दुबला हुआ जा रहा है आडवाणी कैंप
Jan 28, 2009 1:36PM
 
Dr. A.S. Haque  said...
No...., Never Mr. Advani should b given a chance to b PM,chargesheeted, main accused in violence, inhuman activities in the past
Jan 27, 2009 8:04PM
 
Tejvir Singh Atri  said...
Star News ka yah prayas bahut hi uttam hai. eske liye me Star News ko badhai deta hoon.
Jan 27, 2009 3:17PM
 
vidya  said...
its actually not an easy going for advani...but dont you think modi is actually a better option for pm post from BJP??
Jan 24, 2009 2:55PM
 
     
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