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रिपोर्टर डायरी


जसवंत सिंह ने किया आडवाणी का बचाव
 
  • Reporter : स्टार न्यूज

जसवंत सिंह ने खुलासा किया है कि आडवाणी यात्रियों के बदले आतंकवादियों को छोड़े जाने के खिलाफ थे। लेकिन आडवाणी के बचाव में जसवंत का बयान?
दार्जिलिंग से चुनाव मैदान में उतरे जसवंत सिंह ने कंधार विमान प्रकरण में फिर खोली है अपनी जुबान जसवंत ने।एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में जसवंत ने कहा है कि:
1.कंधार विमान मामले में यात्रियों के बदले आतंकियों को छोड़ने के खिलाफ थे आडवाणी और अरुण शौरी
2.अटल जी के कहने पर मैंने यात्रियों के बदले आतंकियों को छोड़ने की मजबूरी आडवाणी को समझायी थी
3.आडवाणी ने मुद्दे पर फारूख अब्दुल्ला की राय भी जानने की बात कही थी
4.कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर जल्दबाजी में फैसला लिया गया।पर उससे पहले यात्रियों के बदले आतंकियों को छोड़ने पर गंभीर विचार विमर्श हुआ था।
जसवंत का बयान महत्वपूर्ण क्यों?
जसवंत सिंह के बयान का महत्व इस लिए है क्योंकि
24 मार्च 2008 को आडवाणी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि
कंधार प्रकरण में यात्रियों के लिए आतंकियों की छोड़ने की बात मेरी जानकारी में नहीं थी उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी से इस बारे में बात की होगी।
आडवाणी ने ये बात तब कही जबकि उनसे कहा गया कि जसवंत सिंह के मुताबिक आपको यात्रियों के लिए आतंकियों को छोड़े जाने की खबर थी।चुनाव के दौरान इस विवाद में घी काम किया फारुख अब्दुल्ला ने। उन्होंने आडवाणी जी के साथ फोन पर हुई अपनी बातचीत का हवाला दे ये साबित किया था कि आडवाणी जी को आतंकियों को छोड़ने की पूरी जानकारी थी।
“फारुक: हम मसूद अजहर और मुश्ताक जरगर जैसे आतंकियों को छोड़ नहीं सकते हैं क्योंकि उन पर हमारी अदालतों में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं।
आडवाणी:ये केन्द्रीय कैबिनेट का फैसला है और आपको इस बारे में हमारी मदद करनी होगी।“
ऐसे में अब अगर जसवंत सिंह ये कहते हैं कि आडवाणी यात्रियों के बदले आतंकियों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे और ऐसा उन्होंने तब किया जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनपर दबाव बनाया तो आडवाणी की मजबूत नेता की छवि मजबूत होगी।और आडवाणी को कांग्रेसी हमलों से राहत मिलेगी।

अब क्यों कहा?
इतना ही नहीं कांग्रेसियों ने बीजेपी के मजबूत नेता निर्णायक सरकार के पूरे चुनावी प्रचार में इस कंधार मुद्दे से सेंध लगाने की कोशिश की थी ऐसे में जसवंत सिंह ही वो शख्स थे जो आडवाणी को इस कांग्रेसी हमले से राहत दिला सकते थे और उन्होंने चुनाव के वक्त ये बयान देकर वो बात पूरी कर दी है।

अपनी किताब में खुलास क्यों नहीं किया?
ऐसे में सवाल उठता है कि जसवंत सिंह ने कंधार विमान अपहरण पर लिखी गयी अपनी किताब ए कॉल टू ऑनर में इन बातों का खुलासा क्यों नहीं किया जिसका उल्लेख आडवाणी जी ने अपनी किताब माई कंट्री माई लाइफ में कुछ यूं किया है।
मैं बंधकों के बदले आतंकवादियों को छोड़ने के पक्ष में नहीं था।हांलाकि हमारी सरकार के सामने अति विषम परिस्थितियां थीं।

यहां आकर तस्वीर बिल्कुल साफ होती है।
1.आडवाणी बंधकों के बदले आतंकियों की रिहायी के खिलाफ थे
2.अटल के दबाव में आडवाणी आतंकी रिहायी के लिए तैयार हुए
3.आडवाणी ने फारुख को विश्वास में लेने के लिए फोन किया
4.उसी फोन का जिक्र फारुख ने अपने खुलासे में किया है
5.पर कांग्रेस आडवाणी को इस मुद्दे पर घेर रही है।

जसवंत का बयान चुनावी चाल तो नहीं?
कंधार मामले में कांग्रेसी चक्रव्यूह में घिरे आडवाणी को राहत दिलाने की कोशिश भी हो सकता है जसवंत ये खलासा।जिसे अपने किताब में लिखने का साहस वो न जुटा सके उसे चुनाव के वक्त ऐसे माहौल में बोलना निश्चित तौर पर चुनावी चाल है ताकि आडवाणी को कांग्रेस के बाणों से राहत मिल सके।
 
     
 
 







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